Saturday, 30 July 2011

विषय बड़ा यह शोध का, तरह तरह के थुक्कड़, 
राजा-रंक  फकीर  भी, हो  अमीर  या  फक्कड़ |
हो  अमीर  या  फक्कड़,  थूके   आसमान  में
हैं  सब  ही  मशगूल, प्यार  से  पीक - दान में |
चाट-चूट कर थूक,  थूक  कर  चाट  हमेशा,
टोपी  टोपी  खेल,  आज  का  बढ़िया पेशा ||

Friday, 22 July 2011

रेल - अधिकारी

 ड्राइवर  को  दोषी  बता,  बचा  रहे थे  जान,
जान  नहीं  पाए  उधर, जिन्दा   है   इंसान |

जिन्दा    है    इंसान,   थोपते   जिम्मेदारी,
आलोचक  की  देख,   बड़ी   भारी  मक्कारी |

कह रविकर समझाय, निकाले मीन-मेख सब-
मुंह  मोड़े  चुपचाप,  मिले  उनको  जिम्मा जब ||

Friday, 15 July 2011

हम तोहार पति हां, झूरे गुरराता है ||

मैंने कहा पति हूँ मै,,कोई चपरासी नहीं,
पर मेरी टिप्पणी ||

सूखा नशा देह दशा, सारी तो बिगाड़ लई
भूखे पेट ले ढकोर,  सुध विसराता है |
दारू में सत्तर खर्च, सैकिल को बेंच-बांच
अस्सी रूपया हाथ मा, सुक्खल धराता है |
बच्चे को मंदिर भेज, बुढ़िया को विद्यालय
सब्जी के बदले घर, दारु भिजवाता है |
खर्राटे भर-भर के,  रतिया  गुजार  देत
हम तोहार पति  हां,   झूरे  गुरराता  है  ||

Tuesday, 12 July 2011

दूल्हा नहीं बनावत हमका

जबरे  बहुत  सतावत  हमका
उल्टा  रहे  सिखावत  हमका
माँ ! तुमसे डेर-वावत हमका--
इधर -उधर  दौरावत  हमका  ||
 

राज - पाट   से   होई  का ?
दूल्हा  नहीं  बनावत हमका |
एम पी  से  गए  भगाए  अपना 
यू पी  मा  भुगतावत हमका ||

Sunday, 10 July 2011

नैतिक शिक्षा

ram ram bhai पर मेरी  टिप्पणी 

जिम्मेदारी   के   लिए,  हो   जाओ  तैयार,  

बच्चों के प्रति है अगर, थोडा सा भी प्यार |

थोडा सा भी प्यार,  बड़ा  विश्वास जगाओ--
सबसे पहले स्वयं,  कठिन संयम अपनाओ |
है  जो  बात  जरुरी,  उसकी  करो  तैयारी |
नैतिक शिक्षा हुई ,   आज  की जिम्मेदारी ||


स्नेहमयी  स्पर्श  की, अपनी  इक  पहिचान,  
बुरी-नियत संपर्क का, चलो  दिलाते  ध्यान |
चलो  दिलाते  ध्यान, बताना   बहुत  जरुरी,
दिखे  भेड़  की  खाल, बना  के  रक्खे  दूरी |
करो   परीक्षण  स्वयं, बताओ सीधा रस्ता,
घर  आये   चुपचाप,  उठा के अपना बस्ता ||


पहली  कक्षा  में  सिखा, सेहत  के  सब  राज,
और  आठवीं  में  बता ,  सब  अंगों  के  काज |
सब  अंगों  के  काज,  मगर   विश्वास  जरुरी,
धीरे - धीरे    शांत,  करो     उत्सुकता     पूरी |
खतरे - रोग - निदान,  बताना  एक - एक  कर,
पशु-पिशाच  की  भीड़ , हमेशा  देख-रेख  कर ||


चंचल मन पर क्या कभी, चला किसी का जोर
हलकी  सी   बहती   हवा,   आग   लगाए   घोर |
आग    लगाए     घोर,   बचाना    चिंगारी    से,
पढना  लिखना  खेल,  सिखाओ  हुशियारी  से |
कह  रविकर  समझाए,  अगर  पढने  में  कच्चा,
रखिये   ज्यादा  ध्यान,  बिगड़  जाये  न  बच्चा ||




बच्चों को भी हो पता,  होवेगा  कब  व्याह,
रोजगार से लग चुका,  तब भी भरता आह |
तब भी भरता आह,   हुवा वो  पैंतिस  साला--
बढ़  जाते  हैं  चांस,  करे  न  मुँह  को काला |
सही समय पर व्याह,  कराओ  उसका  भाई,
इधर-उधर  हर-रोज  करे  न  कहीं  सगाई  ||

Saturday, 9 July 2011

सिंगार --

                   (1)
हर-सिंगार  बकवास है--
जिसपर ध्यान नहीं जाए |
बिन-सिंगार वो खास है--
अनायास  आकृष्ट  कराये ||  

                 (2)

इसी  गली  से  क्यूँ ?

तुम  गुजरते  हो  यूँ  

निर्लिप्त - निर्विकार  

कहो  तो  न  जियूं ||

                (3)

ओ प्रेम-दीवानी --
*बागर पर बैठी रानी !   * नदी के किनारे बेहद ऊंची जगह
बादल आये
बरसे 
प्रेम-जल बाढ़ा--
कई बन्ध टूटे
पर अब भी
जीवन नैया
मिलन को तरसे
तुम क्यूँ रूठे ??